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शायद मैं ग़लत हूँ
मूल शीर्षक:I May Be Wrong
लेखक:ब्योर्न नत्तिको लिंडेब्लाड (Björn Natthiko Lindeblad) ⓘ
शायद मैं ग़लत हूँ

पढ़ने से पहले, एक गाना सुनिए!

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  1. ♪
  2. Οκτώ χρονών, σ' ένα νησί του Βορρά,आठ साल की उम्र में, उत्तर के एक द्वीप पर,
  3. ο κόσμος σώπασε, γέμισε φως,दुनिया शांत हो गई, रोशनी से भर गई,
  4. μια φωνή μού είπε «καλώς ήρθες σπίτι»,एक आवाज़ ने कहा, "घर में स्वागत है",
  5. κι από τότε ψάχνω τον δρόμο ξανά.और तब से मैं फिर वही राह ढूँढ रहा हूँ।
  6. Άφησα τη θέση, τα λεφτά, τ' όνομά μου,मैंने पद, पैसा, अपना नाम छोड़ दिया,
  7. φόρεσα ράσο στα δάση της Ταϊλάνδης,थाईलैंड के जंगलों में चीवर पहन लिया,
  8. μα ο νους μου, τσίρκο με χίλιους πιθήκους,पर मेरा मन, हज़ार बंदरों का सर्कस,
  9. φωνάζει «πρέπει» και δεν σταματά."चाहिए" चिल्लाता है और रुकता नहीं।
  10. Ανάσα μέσα, το νερό ανεβαίνει,साँस अंदर, पानी ऊपर उठता है,
  11. ανάσα έξω, κατεβαίνει ξανά,साँस बाहर, फिर नीचे उतरता है,
  12. ανοίγω τις χούφτες, το αφήνω να φύγει,मैं मुट्ठियाँ खोलता हूँ, उसे जाने देता हूँ,
  13. δεν είμαι εγώ κάθε σκέψη που περνά.मैं हर गुज़रता विचार नहीं हूँ।
  14. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  15. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  16. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  17. κι η καρδιά μου ελαφραίνει ξανά.और मेरा दिल फिर हल्का हो जाता है।
  18. Δεν πιστεύω κάθε σκέψη,मैं हर विचार पर यक़ीन नहीं करता,
  19. σαν σύννεφο περνά,वह बादल की तरह गुज़र जाता है,
  20. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  21. κι αυτό με ελευθερώνει, ναι.और यही मुझे आज़ाद करता है, हाँ।
  22. ♪
  23. Γύρισα σπίτι χωρίς δουλειά, χωρίς λεφτά,मैं घर लौटा, बिना काम, बिना पैसे,
  24. ο πιο αποτυχημένος σ' όλη τη Σουηδία,पूरे स्वीडन का सबसे नाकाम इंसान,
  25. κάποιος μού ψιθύρισε «κι αυτό θα περάσει»,किसी ने फुसफुसाया, "यह भी गुज़र जाएगा",
  26. και πέρασε, όπως λιώνει το χιόνι την άνοιξη.और यह गुज़र गया, जैसे वसंत में बर्फ़ पिघलती है।
  27. Κάθε άνθρωπος που συναντάςहर इंसान जिससे तुम मिलते हो
  28. δίνει μια μάχη που εσύ δεν ξέρεις,एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है जिसे तुम नहीं जानते,
  29. γι' αυτό να 'σαι καλός, πάντα καλός,इसलिए दयालु रहो, हमेशा दयालु,
  30. κι άσε λίγο χώρο για θαύματα.और चमत्कारों के लिए थोड़ी जगह छोड़ो।
  31. Ο θυμός θα 'ρθει, μα τίποτα δεν κατακτά,ग़ुस्सा आएगा, पर कुछ जीत नहीं पाएगा,
  32. το πιο πολύτιμο πετράδιसबसे क़ीमती रत्न
  33. ήταν πάντα στην τσέπη μου.हमेशा मेरी जेब में था।
  34. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  35. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  36. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  37. κι η καρδιά μου ελαφραίνει ξανά.और मेरा दिल फिर हल्का हो जाता है।
  38. Δεν πιστεύω κάθε σκέψη,मैं हर विचार पर यक़ीन नहीं करता,
  39. σαν σύννεφο περνά,वह बादल की तरह गुज़र जाता है,
  40. Μπορεί να κάνω λάθος,शायद मैं ग़लत हूँ,
  41. κι αυτό με ελευθερώνει, ναι.और यही मुझे आज़ाद करता है, हाँ।
  42. Κάθισε δίπλα μου, φίλε μου εαυτέ,मेरे पास बैठो, मेरे दोस्त, मेरे अपने आप,
  43. δεν ξέρω πολλά…मैं ज़्यादा नहीं जानता…
  44. μπορεί να κάνω λάθος.शायद मैं ग़लत हूँ।
  45. ♪
  46. …και λίγο μάνγκο με κολλώδες ρύζι.…और थोड़ा मैंगो स्टिकी राइस।
Οκτώ χρονών, σ' ένα νησί του Βορρά,आठ साल की उम्र में, उत्तर के एक द्वीप पर,

इस यूनानी द्वीप पर आपका स्वागत है! यह गाना यूनानी भाषा में लिखा गया है, वर्ल्ड फ़्यूज़न शैली में।

वाद्यों में हमने यूनानी बुज़ूकी को पूर्वोत्तर थाईलैंड के ईसान क्षेत्र के फिन वाद्य के साथ मिलाया है। दोनों के बीच का सांस्कृतिक संवाद यह दिखाने की कोशिश करता है कि एक यूरोपीय लेखक ने थाईलैंड में भिक्षु के रूप में साधना करते हुए क्या महसूस किया। साथ ही मंदिर की घंटियाँ, कीड़ों और चिड़ियों की आवाज़, बारिश और गरज भी जोड़ी गई है, मानो आप जंगल के मठ में कदम रख रहे हों।

हम यह नहीं चुन सकते कि कौन-से विचार दिमाग़ में आएँ, पर यह चुन सकते हैं कि उन पर विश्वास करें या नहीं; आसक्ति, टकराव और अनित्यता के सामने एक सच्चा “मैं ग़लत हो सकता हूँ” मन की पकड़ ढीली करने देता है।
पढ़ने की प्रगति 90%
▶ पढ़ने का मन नहीं? यहाँ किताब का वीडियो सार है :)
▶ किताब का वीडियो सार जल्द आ रहा है
Sail to तस्मानिया

यह किताब किसके लिए है?

  • वे लोग जो अक्सर दिमाग़ के विचारों और भावनाओं से खिंचे चले जाते हैं, ज़्यादा सोचने की प्रवृत्ति वाले
  • वे जो टकराव में हमेशा ख़ुद को सही ठहराने पर अड़े रहते हैं, जिससे रिश्तों में तनाव आता है
  • वे लोग जिनका करियर सफल दिखता है पर भीतर ख़ालीपन महसूस होता है
  • कोई भी जो क्षति, बीमारी या जीवन के निचले दौर का सामना कर रहा है और शांति पाना चाहता है

लेखक कौन हैं?

  • स्वीडिश; स्टॉकहोम स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स किया और 26 की उम्र में एक स्वीडिश कंपनी की स्पेनी सहायक कंपनी के CFO बने; बाद में भारत में संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्री के रूप में काम किया
  • 1992 में उत्तर-पूर्वी थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय वन-मठ वाट पाह नानाचाट में “नत्तिको” नाम से दीक्षा ली; थाई वन परंपरा में 17 वर्ष अभ्यास किया, फिर 2008 में चीवर त्यागकर स्वीडन लौटे और ध्यान सिखाने तथा व्याख्यान देने लगे
  • 2012 में स्वीडिश रेडियो कार्यक्रम “Sommar” में आने के बाद व्यापक ध्यान मिला; 2018 में ALS का निदान हुआ, और 2020 में कैरोलिन बैंकलर और नवीद मोदिरी के साथ यह किताब प्रकाशित की
  • 17 जनवरी 2022 को 60 वर्ष की आयु में घर पर परिवार के बीच निधन; अंग्रेज़ी संस्करण उसी वर्ष आया और कई यूरोपीय देशों में बेस्टसेलर बना

किताब की संरचना

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Sail to तस्मानिया
CFO से वन-भिक्षु तक

यह किताब लेखक के संस्मरण-शैली के निबंध हैं, जो जीवन की कहानियों और गुरुओं की सीखों को पिरोकर वन-मठ के 17 वर्षों में पाई गई बुद्धि साझा करती है।

1. आठ वर्ष की उम्र में “घर लौटना”: निरंतर जागरूकता

8 वर्ष की उम्र में, एक छोटे स्वीडिश द्वीप पर दादा-दादी के घर, वे खिड़की पर रखे टोस्टर को देख रहे थे कि अचानक दिमाग़ का शोर थम गया। आसपास सब कुछ झिलमिलाने लगा और समय मानो ठहर गया। सीने में गर्माहट उमड़ी (बाद में उन्होंने समझा कि यह कृतज्ञता थी), और एक वाक्य उभरा: “घर में स्वागत है।” उपस्थिति का वह एहसास जीवन भर उनकी खोज बन गया।

2. CFO पद छोड़ना: सफलता ख़ुशी नहीं

  • 26 की उम्र में वे एक स्वीडिश कंपनी की स्पेनी सहायक कंपनी के सबसे कम उम्र के CFO बने, फिर भी अक्सर चिंतित रहते और केवल इच्छाशक्ति से उत्साह का दिखावा कर पाते
  • Zen and the Art of Motorcycle Maintenance पढ़ने के बाद उन्होंने ध्यान शुरू किया; एक सत्र के अंत में एक विचार साफ़ उभरा: “आगे बढ़ने का समय आ गया है।” उन्होंने लगभग बिना हिचक इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया
  • इसके बाद उन्होंने बर्तन धोए, संकट-परामर्शदाता के रूप में स्वयंसेवा की, एक साल साहित्य पढ़ा, संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्री के रूप में काम किया, और दक्षिण-पूर्व एशिया और हिमालय में बैकपैकिंग की

फिर उन्होंने उत्तर-पूर्वी थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय वन-मठ में दीक्षा ली और “नत्तिको” नाम पाया, जिसका अर्थ है “वह जो बुद्धि में बढ़ता है।”

3. अधिक साँस लें, कम सोचें

  • मेरे विचार हैं, पर मेरे विचार मैं नहीं हूँ: विचार स्वयं समस्या नहीं; हर विचार से स्वचालित, लापरवाह तादात्म्य समस्या है
  • लेखक “सकारात्मक सोच” के बजाय “साँस लेना” और “हाथ खोलना” जैसी शारीरिक क्रियाओं को प्रोत्साहित करते हैं

पानी की बोतल वाली साँस: कल्पना करें कि आप पानी की बोतल हैं। साँस लेते समय पानी धीरे-धीरे तल से ऊपर उठता है; छोड़ते समय स्तर गिरता है। साँस लेते हुए अपने शरीर से कोमलता से बात करें।

4. वन-मठ का दैनिक जीवन

  • सामूहिक ध्यान के लिए सुबह 3:30 बजे उठना (शुरू में वे अक्सर ऊँघ जाते)
  • दिन में एक भोजन, ग्रामीणों की भिक्षा से
  • काम और ध्यान, भिक्षुओं के 227 नियमों का कड़ाई से पालन, जिनमें सबसे गंभीर चार हैं: चोरी, यौन संबंध, हत्या, और आध्यात्मिक उपलब्धि के बारे में झूठ
  • सभागार में आते-जाते बुद्ध-प्रतिमा को तीन बार प्रणाम: शुरू में यह बहुत बार लगा, पर उन्होंने पाया कि बार-बार माथा ज़मीन से छुआने से वह “छोटा स्व” धीरे-धीरे शांत हुआ जो हमेशा “चाहिए” और “नहीं चाहिए” चिल्लाता रहता था
हर विचार पर विश्वास न करें

17 वर्षों के अभ्यास के बाद लेखक कहते हैं कि उनकी सबसे क़ीमती उपलब्धि यह है: “मैं अब अपने हर विचार पर विश्वास नहीं करता।” वे इसे अपनी महाशक्ति कहते हैं।

  • विचार बिन बुलाए आते हैं: मन एक “भीतरी बंदर सर्कस” जैसा है; केवल मृतकों का मन सचमुच शांत होता है। हम नहीं चुन सकते कि कौन-से विचार उठें, पर चुन सकते हैं कि उन पर विश्वास करें या नहीं
  • विचार तथ्य नहीं: ग़ुस्सा, चिंता और फ़िक्र विचारों को बर्फ़ के गोले की तरह बढ़ाते हैं; उनसे थोड़ी दूरी रखना ही स्वतंत्रता है
  • तर्क साधन है, स्वामी नहीं: अजान चा ने बुद्धि की तुलना कुल्हाड़ी से की—लगातार चलाओ तो कुंद हो जाती है; ज़रूरत पर निकालो और बाक़ी समय म्यान में रखो ताकि धार बनी रहे
  • अंतर्ज्ञान को बोलने दें: तर्क से परे एक “बुद्धि” है जिसे केवल स्थिर होने पर सुना जा सकता है। लेखक आइंस्टीन को उद्धृत करते हैं: सहज मन पवित्र उपहार है और तर्कसंगत मन वफ़ादार सेवक, पर समाज सेवक का सम्मान करता है

बुद्ध के तीन उपहार

  1. सचेत श्वास: जब शोक, चिंता या अकेलापन घेरे, तो दिमाग़ के फेंके हर विचार पर विश्वास करने के बजाय सचेत रूप से साँस लेना और ध्यान शरीर में रखना चुनें। लेखक ने ख़ुद से एक समझौता किया: अब से उनका मार्गदर्शक तारा होगा ऐसा व्यक्ति बनना जो ख़ुद के साथ अधिक सहज हो, ख़ुशी से स्वयं हो, हमेशा अपने विचारों से शासित न हो—और किसी दिन अपना अच्छा दोस्त भी।
  2. हार मानते समय एक गर्म मुस्कान: ख़ुद से कहें, “अच्छी नींद लो! तुमने बहुत प्रगति की है। शायद कल सुबह अलग लगे।”
  3. ध्यान कहाँ रखें यह चुनना: जब चीज़ें बहुत कठिन हों, तो अपना ध्यान दिशा दें और चुनें कि मन को कहाँ विश्राम दें

मूल शुद्धता

बौद्ध धर्म मानता है कि हमारा स्वभाव मूलतः शुद्ध है; ग़ुस्सा और ग़लतियाँ केवल बाहरी खोल हैं, हमारा सार नहीं। इसलिए एक विचार या एक चूक आपको बुरा इंसान नहीं बनाती।

विनम्रता का महत्व

ज्ञान अपनी जानी हुई हर चीज़ पर गर्व करता है; बुद्धि न जानी हुई हर चीज़ के सामने विनम्र होती है।

स्वैच्छिक मानसिक पीड़ा

  • लोगों की अधिकांश मानसिक पीड़ा स्वैच्छिक और स्व-निर्मित है, और सबसे पीड़ादायक विचार है “चाहिए”
  • ख़ुशी की गुणवत्ता उसमें है जो अनुपस्थित है, न कि जो उपस्थित है

छोड़ें, और मानें कि अक्सर नहीं छोड़ पाते

लेखक जीवन का सामना “बंद मुट्ठी” के बजाय “खुले हाथ” से करने की वकालत करते हैं: कम नियंत्रण, अधिक भरोसा। वे मानते हैं कि वन-भिक्षु के रूप में भी दस में से नौ बार वे नहीं छोड़ पाए, इसलिए ख़ुद पर सख़्त होने की ज़रूरत नहीं।

उन विचारों से मुक्त होने का एकमात्र तरीक़ा, जो हमें आहत, अन्याय-पीड़ित, बेकार, अकेला, डरा, उदास या ग़ुस्सा महसूस कराते हैं, उन्हें जाने देना है—भले वे सही हों। जिन विचारों को छोड़ना सबसे कठिन है, वे अक्सर अंत में हमें सबसे अधिक चोट पहुँचाते हैं।

लेखक यह भी कहते हैं: अराजकता आपको अस्थिर कर सकती है, पर व्यवस्था आपकी जान ले लेगी।

किताब एक दृष्टांत सुनाती है: एक पर्वतारोही चट्टान से लटका है, एक छोटे पेड़ को पकड़े, और पकड़ छूटने ही वाली है। ईश्वर प्रकट होकर मदद की पेशकश करते हैं, एक ही निर्देश के साथ: “छोड़ दो।” पर्वतारोही पूछता है, “क्या ऊपर कोई और है?”—इतना हम उन विचारों को छोड़ने का विरोध करते हैं जिनसे चिपके हैं।

जादुई मंत्र: “मैं ग़लत हो सकता हूँ”

एक शाम आधी रात के क़रीब ध्यान के दौरान, मठाधीश अजान जयसारो शिक्षक-आसन पर बैठे और बोले, “आज रात मैं तुम्हें एक जादुई मंत्र सिखाऊँगा।” रहस्यवाद से बचने वाली वन परंपरा में इस शुरुआत ने सबको चौंका दिया।

उपयोग कैसे करें: जब टकराव हो और रिश्ता टूटने वाला हो, तो सच्चे मन से ख़ुद से तीन बार कहें—“मैं ग़लत हो सकता हूँ। मैं ग़लत हो सकता हूँ। मैं ग़लत हो सकता हूँ।”

  • यह “मैं सही हूँ,” सबसे ज़हरीले विचार, को ढीला करता है और संवाद के लिए जगह खोलता है
  • अजान चा ने एक बार कहा था कि उनके पश्चिमी शिष्यों के जागरण में सबसे बड़ी बाधा “राय” थी
  • एक और शिक्षक अजान सुचित्तो ने याद दिलाया: “सही” होना कभी मुद्दा था ही नहीं
  • लेखक ने पाया कि जितने बड़े होते गए, “राय रखना” उनके लिए उतना कम मायने रखने लगा

लेखक संत होने का दिखावा नहीं करते: वर्षों बाद नाश्ते पर पत्नी एलिज़ाबेथ से बहस करते हुए, उन्होंने याद दिलाया, “क्या यह उस वाक्य का समय नहीं?” और उन्होंने बच्चों जैसा जवाब दिया, “नहीं, मैं दूसरा इस्तेमाल करूँगा—तुम ग़लत हो सकती हो।”

दूसरों के साथ जीने का अभ्यास

1. उन्हें जैसे हैं वैसे पसंद करें

मठ का जीवन चौबीसों घंटे का सामुदायिक जीवन है, और आप साथ रहने वाले नहीं चुन सकते। लेखक ने पाया कि लगातार दूसरों को आँकना बस आपको थकाता है और टकराव गहरा करता है; उपाय है लोगों को जैसे हैं वैसे पसंद करना सीखना, न कि उनसे बदलने की अपेक्षा। मठ इसकी तुलना साथ रखे खुरदरे पत्थरों के ढेर से करता था: समय के साथ एक-दूसरे से रगड़कर हर एक चिकना और चमकदार हो जाता है।

2. “मुझे पता होगा”

किताब एक भिक्षु के बारे में बताती है जिसने नियम तोड़ने से इनकार किया, तब भी जब कोई कभी पता नहीं लगा पाता। उनका एकमात्र कारण: “मुझे पता होगा।” नैतिकता दूसरों की स्वीकृति के लिए नहीं, बल्कि साफ़ अंतरात्मा के लिए है।

3. चमत्कारों के लिए जगह छोड़ें

भिक्षु के रूप में 10 वर्ष बाद लेखक “अजान” (शिक्षक) बने जो शिष्यों का मार्गदर्शन कर सकते थे। अपना पहला रिट्रीट चलाते हुए उन्होंने फिर चिंता में सब कुछ नियंत्रित करने की कोशिश की। भिक्षुणी अजान थानिया ने उन्हें याद दिलाया: “नत्तिको, चमत्कारों के लिए जगह छोड़ना मत भूलो।” पीछे देखने पर, जीवन के लगभग सभी सबसे अच्छे अनुभव अनियोजित थे; बहुत कसकर पकड़ो और कुछ हाथ नहीं आता।

जब आपको जानने की ज़रूरत होगी, तब आप वह जान लेंगे जो जानना ज़रूरी है।

चीवर त्यागने के बाद का निचला दौर: यह भी गुज़र जाएगा

भिक्षु के रूप में 17 वर्षों के बाद लेखक प्रेम और सांसारिक जीवन का अनुभव करना चाहते थे और चीवर त्यागकर स्वीडन लौटने का फ़ैसला किया। उन्हें उम्मीद थी कि वे ज्ञानी बनकर लौटेंगे; इसके बजाय उन्हें काम नहीं मिला, बेरोज़गारी भत्ता नहीं मिला, और वे एक साल से अधिक अवसाद में डूबे रहे, ख़ुद को स्वीडन का सबसे बड़ा असफल व्यक्ति महसूस करते हुए।

  • ध्यान से उन्होंने ध्यान को विनाशकारी विचारों से वापस साँस पर लाया, बार-बार पहचानते हुए कि “ये विचार सच नहीं हैं”
  • एक दोस्त ने उनसे कहा, “यह भी गुज़र जाएगा।” और ऐसा ही हुआ: बोलने के निमंत्रण आने लगे, और वे अपनी पत्नी एलिज़ाबेथ से मिले
  • यह वाक्य एक प्राचीन फ़ारसी राजा की दृष्टांत-कथा से आता है; एलिज़ाबेथ ने इसे उनकी शादी की अँगूठियों पर भी खुदवाया

ख़ुद से शुरू करें

बुद्ध ने मन की चार उदात्त अवस्थाएँ बताईं जिन्हें “चार अपरिमेय” या “ब्रह्मविहार” कहा जाता है, जिसका अर्थ है ब्रह्मा के निवास-स्थान। ये हैं मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा (समभाव)। इन तक कैसे पहुँचें? हमें ख़ुद से शुरू करना होगा।

  • आत्म-करुणा के बिना दूसरों के प्रति हमारी करुणा में हमेशा दरारें रहेंगी
  • सफलता हो या विफलता, हम कोमलता के हक़दार हैं: अपने दोस्त बनें, और ख़ुद से उसी धैर्य और लहजे में बात करें जो किसी अच्छे दोस्त के साथ रखते
  • दर्द का सामना करते समय हमें दुखती जगह पर जाना चाहिए और जितना हो सके ख़ुद को अधिक करुणा और समझ से देखना चाहिए, “मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था…” कहकर ख़ुद को दोष देने के बजाय

अनित्यता के दो पहलू: कुछ भी टिकता नहीं—यह बुरी ख़बर है, और अच्छी ख़बर भी। दर्द गुज़र जाएगा, और सुंदर क्षण भी, जो वर्तमान को सँजोने का और भी बड़ा कारण है।

अंतिम पाठ: मृत्यु का सामना

2018 में लेखक को ALS का निदान हुआ, डॉक्टरों ने 3 से 5 वर्ष बचे होने का अनुमान लगाया। घर लौटते समय वे एलिज़ाबेथ के साथ बूढ़े न हो पाने के शोक से अभिभूत थे। फिर एक परिचित भीतरी आवाज़ उठी: ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से जीने, कुछ भी अक्षम्य न करने के लिए कृतज्ञता; मृत्यु से डरने की ज़रूरत नहीं—उन्होंने इस एक जीवन में तीन जीवनों का अनुभव भरा था, और यह एक अद्भुत रोमांच था; तुम तैयार हो।

  • उन्होंने जीवन की तुलना पत्तियों से की: कुछ पीली होकर गिरने तक टिकी रहती हैं, कुछ हरी रहते ही गिर जाती हैं—जीवन कभी अनुमान योग्य नहीं था
  • उन्होंने अपने शरीर को एक पत्र लिखा, उसका धन्यवाद करते हुए और उसकी सीमाओं का सम्मान करने का वादा करते हुए
  • उन्होंने 60वें जन्मदिन और विदाई की संयुक्त पार्टी रखी, और 17 जनवरी 2022 को प्रियजनों के बीच शांति से विदा हुए

जीवन के अंत की बुद्धि

  1. दुनिया में जो सबसे अधिक देखना चाहते हैं, वह बनें: ब्रह्मांड हमारे शब्दों और कर्मों के पीछे के इरादों पर प्रतिक्रिया करता है; जो हम भेजते हैं वह अंततः हमारे पास लौटता है। हम दुनिया को वैसा नहीं देखते जैसी वह है, बल्कि जैसे हम हैं
  2. आप जिससे भी मिलते हैं वह एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है जिसके बारे में आप कुछ नहीं जानते: हमेशा दयालु रहें
  3. क्षमा स्वतंत्रता की कुंजी है: ख़ुद से और जो हुआ उससे सुलह करना महान व्यक्ति बनने के बारे में नहीं, बल्कि अपने मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और यह चुनने के बारे में है कि कौन-सी भावनाएँ दिल भरें। फिर भी, छोड़ने की सलाह केवल अपने लिए है—किसी क्रोधित व्यक्ति से छोड़ने को कहना कभी अच्छा ख़त्म नहीं होता। जैसा थाई भिक्षु कहते हैं: “क्रोध उठता है, पर कुछ भी नहीं घेर सकता।”
  4. सबसे क़ीमती रत्न: एक भारतीय कहावत है कि ईश्वर ने सबसे क़ीमती रत्न वहाँ छिपाया जहाँ वे जानते थे कि आप कभी नहीं देखेंगे—आपकी अपनी जेब में

किताब पाठकों के लिए पाँच याद दिलाने वाली बातें छोड़ती है

  1. हर विचार पर विश्वास न करें: विचार आए तो उसे देखें, पर पूरा ग्रहण करना ज़रूरी नहीं
  2. मैं ग़लत हो सकता हूँ: टकराव में सच्चे मन से ख़ुद से तीन बार कहें
  3. दूसरों को जैसे हैं वैसे पसंद करें: लोगों को बदलने की इच्छा छोड़ें
  4. चमत्कारों के लिए जगह छोड़ें: योजनाएँ बनाएँ, पर जीवन को बहुत कसकर न पकड़ें
  5. यह भी गुज़र जाएगा: दर्द गुज़रेगा, और आनंद भी, इसलिए इस क्षण को सँजोएँ

Shang की राय

यह सचमुच बहुत मज़ेदार किताब है!

मुझे डर था कि यह उबाऊ होगी (लग रहा था जैसे धर्म और जीवन के बड़े सबक़ों की किताब हो), पर लेखक का स्वाभाविक रूप से विनोदी, चंचल व्यक्तित्व पूरी किताब को बहुत हल्का बना देता है।

वे मंदिर में ध्यान सीखने आई एक सुंदर एयर होस्टेस को चोरी-छिपे देखते हैं (और उस पल अपने भीतर चली लड़ाई भी दर्ज करते हैं, कितना प्यारा); थाई लोग भिक्षुओं का इतना सम्मान करते हैं कि कुछ उनसे बातचीत में अगली लॉटरी के नंबर निकलवाने की उम्मीद करते हैं; पाप धोना चाहने वाला कोई उनसे अपनी मोटरसाइकिल का एक्सीलरेटर घुमाने को कहता है; अभ्यास के दौरान उपवास में पेय की अनुमति है, तो वे लगातार 8 बोतल कोक पी जाते हैं…

क्या यह जीवन की चुनौतियाँ लेने वाले किसी कंटेंट क्रिएटर के अकाउंट जैसा नहीं लगता, हाहा! पूरी किताब मज़ेदार व्लॉग्स की शृंखला जैसी है—ऐसा अकाउंट ज़रूर वायरल होगा। आख़िर ऊँचे वेतन वाली नौकरी छोड़कर थाईलैंड में भिक्षु बनने से लेकर चीवर त्यागने के बाद ALS और मृत्यु का सामना करने तक, उनके जीवन के अनुभव ऐसे हैं जिनसे आम लोग शायद ही गुज़रते हैं पर जिनके बारे में ज़रूर जानना चाहते हैं। हर अनुभव समझ और बुद्धि के साथ आता है, और चूँकि वे बेहद बुद्धिमान भिक्षुओं के बीच रहे, किताब उनके जीवन-दर्शन भी समेटती है। ख़ासकर अंत में, जब वे जीवन के अंत की ओर बढ़ते हैं, तो एक के बाद एक सुनहरी पंक्तियाँ! QQ

मुझे लगता है यह किताब भी मेरे जीवन में बिल्कुल सही समय पर आई।

मैं पहले एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करती थी, जहाँ वेतन और पद शायद मुझे काफ़ी अच्छा जीवन दे सकते थे, फिर भी मैं उस जीवन में खोई हुई महसूस करती थी। इसलिए मैंने नौकरी छोड़ दी। छोड़ने के एक महीने बाद मैंने एक रिश्ता भी ख़त्म किया। यह लिखते हुए भी मुझे कभी-कभी इसके बारे में उदासी और दर्द महसूस होता है।

ठीक तभी, इटली में रहने वाली एक क़रीबी दोस्त श्वेनश्वेन ने मुझे यह किताब सुझाई। अजीब है न! एक दोस्त जिससे बरसों से नहीं मिली, दूर इटली में, जो सच में नहीं जानती थी कि मैं कौन-सी लड़ाई लड़ रही हूँ, उसने ठीक यही किताब सुझाई। इसने मुझे किताब की वह पंक्ति याद दिलाई: “जब आपको जानने की ज़रूरत होगी, तब आप वह जान लेंगे जो जानना ज़रूरी है।”

इसे पढ़ने के बाद मैं 3 बदलाव आज़माऊँगी:
1. आत्म-करुणा का अभ्यास: यह The Charisma Myth के सिद्धांत से मेल खाता है! जब भी दो बिल्कुल असंबंधित किताबों में बिल्कुल एक ही विचार पढ़ती हूँ, मुझे सुखद आश्चर्य होता है
2. ग़ुस्से में ख़ुद से कहूँ “मैं ग़लत हो सकती हूँ” × 3 (ठीक है, शायद × 10), और ख़ुद को याद दिलाऊँ: जिससे भी मिलती हूँ वह एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है जिसके बारे में मैं कुछ नहीं जानती। दयालु रहूँ।
3. वह बनने की कोशिश करूँ जो दुनिया में सबसे अधिक देखना चाहती हूँ

आह, इसे ख़त्म करने के बाद मुझे सचमुच आम वाला स्टिकी राइस खाने का मन हो रहा है।

और किताबों के सार

  • 《我可能錯了》讀後心得:書中五個智慧錦囊與金句(閱讀前哨站)
  • 《我可能錯了》:我從森林智者的一生學到的 10 堂課(張修修 shosho.tw)
  • I May Be Wrong by Björn Natthiko Lindeblad 書評(Good Reading Magazine)
कवर एक मौलिक डिज़ाइन है, प्रकाशक का असली कवर नहीं

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अभी आप क्या कर सकते हैं

  • किनारे उतरने के लिए नक्शे पर किसी द्वीप पर टैप करें
  • किसी इमारत पर टैप करके उस किताब के नोट्स पढ़ें
  • किस्सागो की कुटिया में Shang से मिलें

जल्द आ रहा है

  • अध्याय 2: यात्री के रूप में पंजीकरण, अपना जहाज़ चलाना, इमारत बैज इकट्ठा करना, बोतल में संदेश भेजना
  • अध्याय 3: सीपियाँ, बंदरगाह बाज़ार, धुंध हटाना, रैंकिंग
  • अध्याय 4: दूसरे यात्रियों से निजी बातचीत

प्रतीक

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किस्सागो की कुटिया का पंजीकरण

रवाना होने से पहले Shang आपके जहाज़ का पंजीकरण करेगा।

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Shang

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