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उद्यमिता का मिथक (The E-Myth Revisited)
मूल शीर्षक:The E-Myth Revisited
लेखक:माइकल ई. गर्बर (Michael E. Gerber) ⓘ
उद्यमिता का मिथक (The E-Myth Revisited)

पढ़ने से पहले, एक गाना सुनिए!

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  1. ♪
  2. 從清晨到深夜 我都守在店裡सुबह से देर रात तक, मैं दुकान पर ही रहता हूँ
  3. 雙手沒空 心也沒停हाथ कभी ख़ाली नहीं, मन भी नहीं रुकता
  4. 什麼都自己來 別人做我不放心सब कुछ ख़ुद करता हूँ, दूसरों पर भरोसा नहीं
  5. 原來我是個師傅 不是老闆पता चला मैं कारीगर हूँ, मालिक नहीं
  6. 請人來幫忙 丟一句「你處理」किसी को रखा और बस कहा "तुम संभालो"
  7. 出了事 又自己跳下去救火कुछ गड़बड़ हुई तो फिर ख़ुद आग बुझाने कूद पड़ा
  8. 假裝這間店 要開一千家मान लो यह दुकान हज़ार शाखाएँ खोलेगी
  9. 把每一步寫下 讓誰接手都不怕हर क़दम लिख डालो, कोई भी संभाल ले
  10. 就算我不在 燈也照樣亮著मैं न भी रहूँ, तो भी रोशनी जलती रहे
  11. 我不在店裡忙 我在經營它मैं दुकान में व्यस्त नहीं, मैं कारोबार चला रहा हूँ
  12. 第一步 主要目標 先問人生想怎麼過पहला क़दम, मुख्य लक्ष्य: पहले पूछो, ज़िंदगी कैसे जीनी है
  13. 別等到頭髮變少 才發現是店在管我बाल झड़ने तक इंतज़ार मत करो यह जानने में कि दुकान तुम्हें चला रही है
  14. 第二步 戰略目標 夢想要寫成數字दूसरा क़दम, रणनीतिक लक्ष्य: सपने को अंकों में लिखो
  15. 三十萬 還是一個億 別只說看運氣तीन लाख या सौ करोड़, बस "क़िस्मत" मत कहो
  16. 第三步 組織圖 職位先排好तीसरा क़दम, संगठन चार्ट: पहले पद तय करो
  17. 總裁是我 清潔也是我 名片印兩套मालिक भी मैं, सफ़ाईवाला भी मैं, दो तरह के विज़िटिंग कार्ड
  18. 第四步 管理系統 不靠吼也不靠罵चौथा क़दम, प्रबंधन प्रणाली: न चिल्लाना, न डाँटना
  19. 照著手冊一步步 菜鳥也變大咖मैनुअल के हिसाब से क़दम-दर-क़दम, नौसिखिया भी उस्ताद बन जाए
  20. 第五步 員工策略 找人不找天才पाँचवाँ क़दम, कर्मचारी रणनीति: इंसान ढूँढो, जीनियस नहीं
  21. 普通人照表操課 一樣演得精彩आम लोग भी योजना पर चलें तो शानदार काम करें
  22. 第六步 行銷 把你的夢想放一邊छठा क़दम, मार्केटिंग: अपना सपना एक तरफ़ रखो
  23. 客人覺得他需要 他才會掏出錢ग्राहक तभी पैसे देता है जब उसे ज़रूरत महसूस हो
  24. 第七步 系統 連說話都寫成劇本सातवाँ क़दम, सिस्टम: बोलने के शब्द भी स्क्रिप्ट में
  25. 歡迎光臨要背熟 還要先問再傾聽"स्वागत है" याद करो, पहले पूछो फिर सुनो
  26. 七個步驟 一套系統 複製一千遍सात क़दम, एक सिस्टम, हज़ार बार दोहराया
  27. 第一千家的薯條 跟第一家一樣鮮हज़ारवीं दुकान के फ्राइज़ भी पहली जैसी ताज़ा
  28. 原來靠的是系統 不是我一個असल में सिस्टम काम आता है, सिर्फ़ मैं अकेला नहीं
  29. 假裝這間店 要開一千家मान लो यह दुकान हज़ार शाखाएँ खोलेगी
  30. 把每一步寫下 讓誰接手都不怕हर क़दम लिख डालो, कोई भी संभाल ले
  31. 就算我不在 燈也照樣亮著मैं न भी रहूँ, तो भी रोशनी जलती रहे
  32. 我不在店裡忙 我在經營它मैं दुकान में व्यस्त नहीं, मैं कारोबार चला रहा हूँ
  33. 規矩是提醒 不是一條死路नियम याद दिलाते हैं, बंद गली नहीं हैं
  34. 先開口問 再安靜地聽पहले पूछो, फिर चुपचाप सुनो
  35. 客人心裡的話 才是最好的地圖ग्राहक के मन की बात ही सबसे अच्छा नक़्शा है
  36. 假裝這間店 要開一千家मान लो यह दुकान हज़ार शाखाएँ खोलेगी
  37. 把每一步寫下 讓誰接手都不怕हर क़दम लिख डालो, कोई भी संभाल ले
  38. 就算我不在 燈也照樣亮著मैं न भी रहूँ, तो भी रोशनी जलती रहे
  39. 我終於 為自己的人生工作आख़िरकार, मैं अपनी ज़िंदगी के लिए काम करता हूँ
  40. ♪
  41. 金門的風 陪我走這條路किनमेन की हवा इस राह पर मेरे साथ चलती है
從清晨到深夜 我都守在店裡सुबह से देर रात तक, मैं दुकान पर ही रहता हूँ

इस ताइवानी द्वीप पर आपका स्वागत है! किनमेन ताइवान में है, इसलिए यह गाना चीनी भाषा में लिखा गया है। इसकी शैली आधुनिक सॉफ़्ट रॉक और हिप-हॉप रैप का मेल है।

मुख्य आवाज़ धुएँ-सी, खरखराती गहरी पुरुष आवाज़ है, जिसके साथ एक साफ़, चमकदार महिला रैप और युगल हार्मनी है। गाना 82 BPM की स्थिर रफ़्तार से साफ़ इलेक्ट्रिक गिटार और गर्म बेस पर चलता है, और कोरस परत-दर-परत गिटारों और पूरे बैंड के साथ फ़िल्मी अंदाज़ में खुलता है। अंत में 32 बार का गिटार सोलो है: ऊँचे बेंड, तेज़ लेगाटो रन और डबल-टाइम ड्रम चरम तक पहुँचते हैं, फिर धीरे-धीरे नीचे उतरकर थमते हैं।

बोल किताब के सात क़दमों पर चलते हैं: सब कुछ ख़ुद करने वाले कारीगर से लेकर सिस्टम से कारोबार चलाने वाले तक, और अंत में पंक्ति आती है "आख़िरकार, मैं अपनी ज़िंदगी के लिए काम करता हूँ"। आख़िर में किनमेन की हवा हर नए उद्यमी के साथ इस राह पर चलती है।

पहले ही दिन से अपने कारोबार को ऐसे डिज़ाइन करें मानो आप उसी जैसी हज़ार शाखाएँ खोलने वाले हैं, ताकि वह आपके मौजूद न रहने पर भी चलता रहे।
पढ़ने की प्रगति 90%
सिफ़ारिश ★★★★★ 3.0 / 5
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▶ किताब का वीडियो सार जल्द आ रहा है
Sail to फू क्वोक

यह किताब किसके लिए है?

  • वे पेशेवर जो नौकरी में थक चुके हैं या कम कमाई से परेशान हैं और बस खुद का बॉस बनना चाहते हैं
  • हर वह व्यक्ति जो अपना कारोबार शुरू करने का सपना देखता है
  • वे कारोबारी जिन्हें लगता है कि सब कुछ खुद ही करना पड़ता है और जो थककर चूर हो चुके हैं

लेखक कौन हैं?

  • अमेरिका के जाने-माने बिज़नेस कोच और लेखक
  • Inc. पत्रिका ने उन्हें "दुनिया का नंबर 1 छोटे व्यवसाय गुरु" कहा
  • E-Myth Worldwide (अब Michael E. Gerber Companies) की स्थापना की और दशकों से अनगिनत छोटे व्यवसाय मालिकों को अपने कारोबार को व्यवस्थित बनाने में मदद कर रहे हैं

अन्य किताबेंThe E-Myth Mastery;Awakening the Entrepreneur Within;The Most Successful Small Business in the World;The E-Myth Manager;The E-Myth Contractor

किताब की संरचना

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Sail to फू क्वोक
उद्यमिता का मिथक (E-Myth)

गर्बर कहते हैं कि छोटे व्यवसायों के ज़्यादातर संस्थापक असल में "उद्यमी" नहीं होते, बल्कि "उद्यमिता के दौरे से पीड़ित तकनीशियन" (technician suffering an entrepreneurial seizure) होते हैं। किसी हुनर में माहिर होने की वजह से उन्हें लगता है कि हुनर जानना ही कारोबार चलाना जानना है। वे कारोबार में कूद पड़ते हैं और फिर रोज़मर्रा के कामों में डूब जाते हैं।

किताब के अनुसार हर उद्यमी के भीतर तीन व्यक्तित्व एक साथ रहते हैं, जो एक-दूसरे को अलग दिशाओं में खींचते हैं:

  • उद्यमी (Entrepreneur): सपने देखता है, भविष्य की ओर देखता है, विज़न और रणनीति बनाता है, और व्यवसाय को ऐसी प्रणाली की तरह डिज़ाइन करता है जो खुद चल सके।
  • प्रबंधक (Manager): योजना, व्यवस्था और पूर्वानुमेयता संभालता है; प्रक्रियाएँ बनाता है, प्रगति पर नज़र रखता है और कामकाज को स्थिर रखता है।
  • तकनीशियन (Technician): खुद हाथ से काम करता है, वर्तमान में जीता है, "खुद अच्छे से करना" पसंद करता है, और अक्सर प्रणालियों और काम सौंपने पर शक करता है।

ज़्यादातर छोटे व्यवसाय मालिक "10% उद्यमी, 20% प्रबंधक और 70% तकनीशियन" होते हैं। यही वजह है कि इतने छोटे व्यवसाय अटक जाते हैं: मालिक काम करने में व्यस्त है, पर व्यवसाय को कोई नहीं चला रहा।

व्यवसाय का जीवन चक्र

गर्बर व्यवसाय के विकास को तीन चरणों में बाँटते हैं:

शैशव (Infancy): मालिक ही व्यवसाय है। सब कुछ वह खुद करता है, और व्यवसाय पूरी तरह एक व्यक्ति की ताक़त और हुनर पर टिका होता है।

बाहर कैसे निकलें: मान लें कि अकेले सब कुछ नहीं हो सकता। सोच जल्दी बदलें: जब व्यवसाय अभी छोटा है, तभी "मैं सबसे अच्छा करता हूँ" वाली तकनीशियन सोच से उसे चलाना बंद करें, और काम को सिर्फ़ लोगों को नहीं, बल्कि प्रणालियों को सौंपने का अभ्यास शुरू करें।

किशोरावस्था (Adolescence): काम इतना बढ़ जाता है कि मालिक अकेले नहीं संभाल पाता, और वह मदद के लिए लोग रखने लगता है।

किशोरावस्था का आम जाल है "पल्ला झाड़कर प्रबंधन" (Management by Abdication): बिना तरीका सिखाए और बिना मानक तय किए कर्मचारियों पर काम "फेंक" देना, बस "तुम संभाल लो" कह देना, और नतीजा ख़राब आने पर खुद कूदकर आग बुझाना। गर्बर इस नकली सौंपने को "पल्ला झाड़ना" कहते हैं, और यही किशोर अवस्था के व्यवसायों के बार-बार अटकने और मालिक के और ज़्यादा थक जाने की मुख्य वजह है।

बाहर कैसे निकलें: "सौंपकर प्रबंधन" (Management by Delegation)। काम फेंकना नहीं, बल्कि नतीजे, मानक और प्रक्रियाएँ साफ़-साफ़ तय करना, कर्मचारियों को उनके अनुसार काम करने का अधिकार देना, और नतीजों पर लगातार नज़र रखना।

परिपक्वता (Maturity): व्यवसाय के पास अब दोहराई जा सकने वाली और बढ़ाई जा सकने वाली प्रणालियाँ हैं, और वह सिर्फ़ संस्थापक के निजी हुनर पर निर्भर नहीं है।

फ़्रैंचाइज़ प्रोटोटाइप और टर्न-की क्रांति

McDonald's की कहानी: रे क्रॉक न रसोइये थे, न रेस्तराँ के काम से आए थे। वे कॉलेज नहीं गए और कई काम बदले: पेपर कप बेचने वाले सेल्समैन, संगीतकार, रेडियो होस्ट, रेस्तराँ कर्मचारी और मिल्कशेक मशीन के सेल्समैन। 1954 में, 52 साल की उम्र में, उन्होंने सुना कि कैलिफ़ोर्निया में एक बर्गर की दुकान उनकी बेची आठ मिल्कशेक मशीनें एक साथ चलाती है और एक बार में चालीस मिल्कशेक बना लेती है। जिज्ञासा में वे वहाँ गए और कार में बैठकर ग्राहकों की कतारें देखते रहे। यहीं से McDonald's के साथ उनकी कहानी शुरू हुई।

गर्बर दो बातों पर ज़ोर देते हैं, जो दिखाती हैं कि क्रॉक की असली प्रतिभा बर्गर बनाना नहीं, बल्कि "प्रणाली डिज़ाइन करना" थी। फ़्रेंच फ़्राइज़ बनाने में वे लगभग धार्मिक अनुष्ठान जैसी सख़्ती चाहते थे, यहाँ तक कि सप्लायरों के आलुओं में पानी की मात्रा जाँचने के लिए हाइड्रोमीटर के साथ लोग भेजते थे। प्रोटोटाइप दुकान में फ़्राइज़ वार्मर में सात मिनट से ज़्यादा नहीं रखे जा सकते थे ताकि नरम न पड़ें, और बर्गर ग्रिल से उतारने के बाद दस मिनट से ज़्यादा नहीं रखे जा सकते थे ताकि रसीले रहें। हर चरण पहले "प्रोटोटाइप दुकान" में परखा जाता, फिर दोहराने लायक और नियंत्रित मानक प्रक्रिया बनाया जाता।

गर्बर के अनुसार McDonald's असल में बर्गर नहीं, बल्कि "कारोबार करने की प्रणाली" बेचता है। कोई भी साधारण कर्मचारी मानक प्रक्रियाओं का पालन करके एक जैसे नतीजे दे सकता है।

उनका कहना है कि चाहे आप फ़्रैंचाइज़ करें या नहीं, हर मालिक को अपना व्यवसाय "भविष्य की हज़ार फ़्रैंचाइज़ दुकानों के प्रोटोटाइप" की तरह बनाना चाहिए। मुख्य सिद्धांत:

  • व्यवसाय ग्राहकों को एक जैसा और पूर्वानुमेय मूल्य दे: ग्राहक को फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उसे कौन सेवा दे रहा है, उसे बस हर बार एक जैसा अनुभव चाहिए।
  • व्यक्ति से ऊपर प्रणाली: मालिक या कर्मचारियों के दिमाग़ में बसी जानकारी को लिखित प्रक्रियाओं, मैनुअल और चेकलिस्ट में बदलें, ताकि व्यवसाय "प्रणाली" से चले, किसी ख़ास "व्यक्ति" की प्रतिभा या मूड से नहीं।
  • "संचालन मैनुअल" (Operations Manual) बनाएँ: हर पद और हर प्रक्रिया को दस्तावेज़ में दर्ज करें, ताकि जो भी काम संभाले, वह उसी गुणवत्ता से कर सके।

McDonald's के अलावा गर्बर उन ब्रांडों के नाम भी गिनाते हैं जो उनकी नज़र में "फ़्रैंचाइज़ प्रोटोटाइप" की भावना दिखाते हैं: FedEx, Disney World, Mrs. Fields कुकीज़, Subway, Domino's Pizza, KFC, Pizza Hut, Taco Bell, UPS और Universal Studios। उनका तर्क है कि ये कंपनियाँ हज़ारों जगहों तक फैलकर भी एक जैसी गुणवत्ता इसलिए बनाए रख पाईं क्योंकि उन्होंने "पहले एक दुकान को बेहतरीन प्रोटोटाइप बनाया, फिर प्रणाली की नक़ल की, लोगों की नहीं"।

प्रोटोटाइप दुकान "सपने का छोटा रूप" है: पूरा सपना पहले एक ही दुकान में साकार और परखा जाता है, और उसके बाद ही फ़्रैंचाइज़ी से कहा जाता है, "आइए, मैं दिखाता हूँ यह कैसे चलता है।" वे ज़ोर देकर कहते हैं: "प्रणाली व्यवसाय चलाती है। लोग प्रणाली चलाते हैं।" (The system runs the business. The people run the system.)

इसीलिए क्रॉक की बनाई व्यवस्था जान-बूझकर फ़्रैंचाइज़ी के "अपने फ़ैसले की गुंजाइश" को कम से कम रखती है। शुरू करने से पहले फ़्रैंचाइज़ी को कड़ा प्रशिक्षण पास करना होता है। अगर मुख्यालय ने व्यवसाय को अच्छी तरह डिज़ाइन किया है, तो हर समस्या पहले ही सोची और सुलझाई जा चुकी होती है, और फ़्रैंचाइज़ी को बस यह प्रणाली संभालना सीखना होता है, खुद से जुगाड़ करना नहीं।

व्यवसाय विकास की प्रक्रिया

गर्बर तीन लगातार चलने वाली प्रक्रियाएँ बताते हैं:

  • नवाचार (Innovation): पुरानी लकीर पर चलने के बजाय काम करने के बेहतर तरीक़े लगातार खोजना।
  • मात्रात्मक मापन (Quantification): आँकड़ों से मापना कि हर नवाचार सचमुच फ़ायदा दे रहा है या नहीं; "जो मापा नहीं जा सकता, उसका प्रबंधन नहीं हो सकता"।
  • समन्वय (Orchestration): जो तरीक़ा कारगर साबित हुआ, उसे मानक बनाकर तय कर देना, मनमानी हटाना ताकि हर बार एक जैसा नतीजा आए।
व्यवसाय विकास कार्यक्रम के सात चरण

गर्बर व्यवसाय की प्रणाली बनाते समय क्रम से सोचने का एक ढाँचा देते हैं:

  1. मुख्य लक्ष्य (Primary Aim)
  2. रणनीतिक लक्ष्य (Strategic Objective)
  3. संगठन रणनीति (Organizational Strategy)
  4. प्रबंधन रणनीति (Management Strategy)
  5. कर्मचारी रणनीति (People Strategy)
  6. मार्केटिंग रणनीति (Marketing Strategy)
  7. प्रणाली रणनीति (Systems Strategy)

1. मुख्य लक्ष्य (Primary Aim)

सबसे पहले तय करें कि आप अपनी ज़िंदगी कैसी चाहते हैं। यही पूरी योजना की शुरुआत है। लेखक ज़ोर देते हैं कि मुख्य लक्ष्य तय किए बिना आप यह नहीं आँक सकते कि व्यवसाय आपके जीवन के लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद करेगा या नहीं।

2. रणनीतिक लक्ष्य (Strategic Objective)

मुख्य लक्ष्य को इस ठोस विवरण में बदलें कि "पूरा होने पर व्यवसाय कैसा दिखेगा" (जैसे आमदनी का आकार; पैमाना पैसा है)।

आपका विज़न कितना बड़ा है? जब वह आख़िरकार पूरा होगा, तो आपकी कंपनी कितनी बड़ी होगी? 3 लाख डॉलर के कारोबार वाली कंपनी? 10 लाख डॉलर की? या 50 करोड़ डॉलर की? अगर आपको जवाब नहीं पता, तो आप कैसे जानेंगे कि आपका व्यवसाय आपको मुख्य लक्ष्य तक पहुँचाएगा या नहीं?

3. संगठन रणनीति (Organizational Strategy)

रणनीतिक लक्ष्य के आधार पर आदर्श संगठन चार्ट और पद बनाएँ, मौजूदा कर्मचारियों की क्षमता के हिसाब से जोड़-तोड़ न करें।

अगर हर कोई सब कुछ करे, तो किसी भी चीज़ की ज़िम्मेदारी किसकी है? संगठन चार्ट के बिना सब कुछ क़िस्मत और अच्छी भावनाओं पर, लोगों के स्वभाव और उनकी आपसी सद्भावना पर टिका रहता है।

एक उदाहरण संगठन चार्ट में ये पद हो सकते हैं:

  • अध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी (COO): रणनीतिक लक्ष्य की कुल उपलब्धि के लिए ज़िम्मेदार; शेयरधारकों को जवाबदेह।
  • मार्केटिंग उपाध्यक्ष: ग्राहक ढूँढने और कम लागत व ज़्यादा सुविधा से उनकी ज़रूरतें पूरी करने के नए तरीक़े खोजने के लिए ज़िम्मेदार; COO को जवाबदेह।
  • संचालन उपाध्यक्ष: मार्केटिंग के वादे पूरे करके ग्राहकों को बनाए रखने और कम लागत व ज़्यादा दक्षता से उत्पादन के नए तरीक़े खोजने के लिए ज़िम्मेदार, ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवा मिले; COO को जवाबदेह।
  • वित्त उपाध्यक्ष: कंपनी के मुनाफ़े के मानक पूरे करके और ज़रूरत पड़ने पर सबसे अच्छी दरों पर पूँजी जुटाकर मार्केटिंग और संचालन विभाग की मदद करता है; यह भी COO को जवाबदेह।
  • मार्केटिंग उपाध्यक्ष के अधीन दो पद: बिक्री प्रबंधक और विज्ञापन/शोध प्रबंधक।
  • संचालन उपाध्यक्ष के अधीन तीन पद: उत्पादन प्रबंधक, सेवा प्रबंधक और सुविधा प्रबंधक।
  • वित्त उपाध्यक्ष के अधीन दो पद: प्राप्य खाते प्रबंधक और देय खाते प्रबंधक।

भले ही कंपनी में सिर्फ़ दो लोग हों, संगठन चार्ट के हर खाने में उन्हीं के नाम भरे जाने चाहिए; ये दोनों एक साथ शेयरधारक भी होंगे और कर्मचारी भी।

अगला कदम है चार्ट के हर पद के लिए पद अनुबंध (Position Contract) लिखना। इसमें उस पद से अपेक्षित नतीजों का सार, पदधारी की ज़िम्मेदारी वाले काम, नतीजों को आँकने के मानकों की सूची, और इन ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए सहमत व्यक्ति के हस्ताक्षर की जगह होती है।

4. प्रबंधन रणनीति (Management Strategy)

एक प्रबंधन प्रणाली बनाएँ और उभरते हुए नए प्रबंधकों को उसका इस्तेमाल सिखाएँ, ताकि संगठन चार्ट के किसी भी पद पर बैठा व्यक्ति पूर्वानुमेय और दोहराए जा सकने वाले नतीजे दे। यही कदम तीसरे चरण में बनाए गए संगठन को सचमुच चलाता है।

5. कर्मचारी रणनीति (People Strategy)

सुनिश्चित करें कि टीम पिछले चरण में बनी प्रबंधन प्रणाली के अनुसार सचमुच काम करे। मुख्य बात है कर्मचारियों को प्रणाली का पालन करने के लिए भर्ती और प्रशिक्षित करना, न कि उनके निजी फ़ैसले या प्रतिभा पर भरोसा करना।

6. मार्केटिंग रणनीति (Marketing Strategy)

ग्राहक की "महसूस की गई ज़रूरतों" को समझें, और उनके आधार पर उन्हें पूरा करने वाला प्रोटोटाइप बनाएँ और परखें।

मार्केटिंग रणनीति बनाते समय आपको अपने सपने, अपना विज़न, अपनी रुचियाँ और अपनी चाहत भूलनी ही होगी। अपने ग्राहक के सिवा सब कुछ भूल जाइए!

एक मशहूर कहावत है: "ज़रूरत ढूँढो और उसे पूरा करो।" यह पूरी तरह सही नहीं है। होना चाहिए: "महसूस की गई ज़रूरत ढूँढो और उसे पूरा करो।" क्योंकि अगर ग्राहक को यह महसूस नहीं होता कि उसे किसी चीज़ की ज़रूरत है, तो उसे सचमुच उसकी ज़रूरत नहीं है, भले ही असल में हो।

यही धारणाएँ ग्राहक की निर्णय प्रक्रिया का केंद्र हैं। अगर आप उनका जनसांख्यिकीय विवरण जानते हैं, तो आप समझ सकते हैं कि ये धारणाएँ क्या हैं, और फिर पता लगा सकते हैं कि उन्हें और उनसे पैदा होने वाली उम्मीदों को पूरा करने के लिए क्या करना है।

हर ग्राहक प्रोफ़ाइल (Demographic Model) की कुछ ख़ास धारणाएँ होती हैं जिन्हें पहले से पहचाना जा सकता है। एक ख़ास उम्र, ख़ास शिक्षा स्तर, ख़ास परिवार के आकार वाली और किसी ख़ास इलाक़े में रहने वाली महिलाएँ बहुत ख़ास मनोवैज्ञानिक कारणों से ख़रीदारी करती हैं। ये अवचेतन कारण अलग उम्र, अलग वैवाहिक स्थिति, अलग शिक्षा वाली और देश के किसी दूसरे हिस्से में रहने वाली महिलाओं के समूह से अलग होंगे।

ऐसे दौर में जब ग्राहक इतने उत्पादों और वादों से घिरे हैं कि उलझन और दुविधा में पड़ जाते हैं, हमारे समय की चुनौती है ग्राहक की भाषा सीखना और उसे साफ़ और धाराप्रवाह बोलना, ताकि शोर के बीच आपकी आवाज़ सुनी जाए।

"ठीक-ठीक, मेरा ग्राहक कौन है? उसकी जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल क्या है? जिन लोगों से आप अभी मिले ही नहीं, उन्हें कैसे ढूँढेंगे?"

7. प्रणाली रणनीति (Systems Strategy)

पिछले छह चरणों से निकले सभी तरीक़ों को "हार्ड सिस्टम, सॉफ़्ट सिस्टम और सूचना सिस्टम" के रूप में दस्तावेज़ में दर्ज करें, ताकि ग्राहक से किया गया अनुभव का वादा सचमुच निभाया जा सके।

इनमें सॉफ़्ट सिस्टम का मतलब बिक्री प्रणाली है। यह आपके और ग्राहक के बीच सोच-समझकर रचा गया संवाद है, जो छह मुख्य चरणों पर चलता है:

  1. बिक्री प्रक्रिया में ख़ास पड़ाव (Benchmarks), यानी ग्राहक के फ़ैसले के बिंदु, पहचानें।
  2. हर बिंदु तक सफलता से पहुँचाने वाले शब्दों को शब्दशः स्क्रिप्ट की तरह लिखें (हाँ, बिल्कुल नाटक की पटकथा की तरह!)।
  3. हर स्क्रिप्ट के साथ इस्तेमाल होने वाली सामग्री तैयार करें।
  4. हर पड़ाव की स्क्रिप्ट याद करें।
  5. अपने सेल्सपर्सन से हर स्क्रिप्ट बिल्कुल एक ही तरीक़े से कहलवाएँ।
  6. कर्मचारियों को बोलने, देखने, ध्यान से सुनने, सुनने, पुष्टि करने, समझने और हर संभावित ग्राहक से जितना हो सके उतना जुड़ने के ज़रिए बेहतर संवाद करना सिखाएँ।

E-Myth Worldwide में इसे "पावर पॉइंट बिक्री प्रणाली" कहा जाता है। उनके साथ काम करने वाली एक करियर डेवलपमेंट कंपनी ने इसे बिल्कुल अनुभवहीन लोगों को सौंपा, और एक साल में आमदनी 300% बढ़ गई।

पावर पॉइंट बिक्री प्रणाली का सबसे अहम हिस्सा पावर पॉइंट बिक्री प्रक्रिया है, जिसमें शामिल हैं:

  1. मुलाक़ात तय करने की प्रस्तुति (The Appointment Presentation)
  2. ज़रूरत विश्लेषण प्रस्तुति (The Needs Analysis Presentation)
  3. समाधान प्रस्तुति (The Solutions Presentation)
लेखक का कार्य-आह्वान

गर्बर पाठकों से एक विचार-प्रयोग करने को कहते हैं: मान लीजिए आप जो दुकान अभी चला रहे हैं, वह आगे पाँच हज़ार शाखाओं का प्रोटोटाइप बनेगी। फिर खुद से तीन सवाल पूछिए:

  • मैं अपने व्यवसाय को अपनी व्यक्तिगत मौजूदगी के बिना कैसे चलाऊँ?
  • मैं अपने कर्मचारियों से बिना बार-बार दख़ल दिए अच्छा काम कैसे करवाऊँ?
  • मैं अपने व्यवसाय को इतना व्यवस्थित कैसे करूँ कि पाँच हज़ार बार दोहराने पर भी पाँच हज़ारवीं शाखा पहली जितनी ही सहजता से चले?

वे साफ़ कहते हैं कि प्रोटोटाइप दुकान को यह मानकर डिज़ाइन करना चाहिए कि उसे "सबसे कम कौशल" वाले लोग चलाएँगे, क्योंकि अगर प्रणाली ऊँचे कौशल वाले लोगों पर निर्भर है, तो उसे दोहराया नहीं जा सकता; ऐसे लोग बाज़ार में दुर्लभ और महँगे हैं। यही "विशेषज्ञ पर निर्भर" (expert-dependent) की जगह "प्रणाली पर निर्भर" (systems-dependent) होने का ठोस रूप है।

Shang की राय

मुझे लगता है कि यह किताब कारोबार शुरू करना चाहने वालों के लिए एक बढ़िया याद दिलाने वाली किताब है। इसमें बताई गई गलतियाँ सचमुच वही हैं जो लोग सहज रूप से कर बैठते हैं।

फिर भी, मेरी राय में किताब की संरचना और साफ़ हो सकती थी, और उदाहरणों में ज़्यादा विविधता होती तो अच्छा था, जैसे स्टार्टअप या सॉफ़्टवेयर कंपनियाँ। हर कोई McDonald's नहीं बनाना चाहता।

यह किताब 2020 में प्रकाशित हुई। तेज़ी से बदलते उद्योग रुझान, अंतरराष्ट्रीय हालात और मार्केटिंग के तरीके, सभी कारोबार खड़ा करने की सोच पर असर डालते हैं। जैसे, लेखक जिन "सिस्टम" की बात करते हैं, उन्हें बनाने में AI का बेहतर इस्तेमाल कैसे हो? कामगारों की कमी के इस दौर में क्या सात चरणों में बदलाव की ज़रूरत है?

इसके अलावा, अपने अनुभव के आधार पर मुझे लगता है कि लेखक की बिक्री प्रणाली में "पूछना और सुनना" जोड़ दिया जाए तो वह और पूरी हो जाएगी।

मेरे लिए यह किताब उद्यमियों के लिए एक याद दिलाने वाली किताब है, ऐसा नियम-पुस्तिका नहीं जिसे मानकर कारोबार खड़ा होना तय हो।

और किताबों के सार

  • The E-Myth Revisited - Book Notes (Ammar Alyousfi's Blog)
  • Book Summary - The E-Myth Revisited (Readingraphics)
कवर एक मौलिक डिज़ाइन है, प्रकाशक का असली कवर नहीं

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