







कबान कहती हैं कि करिश्मा जन्मजात गुण नहीं, बल्कि सीखे जा सकने वाले व्यवहारों का समूह है, जो तीन मुख्य गुणों पर टिका है: उपस्थिति, प्रभाव और आत्मीयता।
किताब ख़ास अभ्यास देती है, जैसे शारीरिक असहजता कम करना और मन की उपस्थिति का अभ्यास करना, ताकि पाठक अलग-अलग पेशेवर हालात में ये गुण दिखा सकें।
अलग हालात में करिश्मे की अलग "शैलियाँ" चाहिए, जैसे रौबदार या आत्मीय। किताब सिखाती है कि संदर्भ देखकर सोच-समझकर शैली चुनें, हर जगह एक ही तरीक़ा न अपनाएँ।